भगवान देवनारायण धर्म, न्याय, करुणा और लोकमंगल के जीवंत प्रतीक : शेखावतः-

मालासेरी (भीलवाड़ा):- केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि भगवान श्री देवनारायण जी केवल गुर्जर समाज के आराध्य देव नहीं, अपितु धर्म, न्याय, करुणा और लोकमंगल के जीवंत प्रतीक हैं। उनका अवतरण ऐसे समय में हुआ, जब समाज को अन्याय और शोषण के विरुद्ध संघर्ष तथा धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा की आवश्यकता थी।
शेखावत रविवार को 1114वें अवतरण अमृत महोत्सव में शामिल हुए। उन्होंने मालासेरी तीर्थ कॉरिडोर के प्रगतिशील कार्यों का अवलोकन किया। साथ ही, मालासेरी डूंगरी में चल रहे साप्ताहिक विष्णु महायज्ञ की पूर्णाहुति कार्यक्रम में शामिल हुए। अपने उद्बोधन में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि भगवान देवनारायण ने सत्ता या वैभव की नहीं, अपितु धर्म की पुनर्स्थापना, सामाजिक न्याय और जनकल्याण की साधना की। इसी कारण वे केवल लोकदेवता नहीं, अपितु पीढ़ी दर पीढ़ी समाज को दिशा देने वाले लोकसंस्कार बने। उन्होंने कहा कि 1114 वर्ष बाद भी उनकी गाथाएं राजस्थान सहित कई राज्यों में लोकगीतों, फड़ वाचन और परंपराओं के माध्यम से जीवंत हैं, जो भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की अद्भुत शक्ति को दर्शाता है।
इतिहास, संस्कृति और सभ्यता पर गर्व:-

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतवासी होने के नाते हमें अपने हजारों वर्षों पुराने इतिहास, सभ्यता और संस्कृति पर गर्व है। उन्होंने बताया कि दुनिया की कई सभ्यताएं समय के साथ स्वयं को ढाल नहीं सकीं और इतिहास में विलीन हो गईं, जबकि भारत हर चुनौती के बावजूद अडिग रहा। भारत को भौगोलिक, सांस्कृतिक और वैचारिक रूप से विभाजित करने के अनेक प्रयास हुए, लेकिन कोई भी शक्ति इसे समाप्त नहीं कर सकी, क्योंकि भारत केवल एक भूभाग नहीं, अपितु सभ्यता, संस्कृति, सद्भाव और अनंत संभावनाओं की जीवंत पहचान है। इसी आत्मबल के सहारे आज भारत अपने उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रख रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की दीर्घ यात्रा में समाजशक्ति की भूमिका निर्णायक रही है। हर युग में समाज के भीतर से उठी चेतना ने अंधकार को दूर किया और जनकल्याण का मार्ग प्रशस्त किया।
धार्मिक स्थलों का उत्थान सरकार की प्राथमिकता:-

शेखावत ने कहा कि भारत में धर्म केवल आस्था तक सीमित नहीं, अपितु संस्कृति, पहचान, पर्यटन और रोजगार का सशक्त माध्यम भी है। इसी दृष्टि से केंद्र सरकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के समग्र विकास को प्राथमिकता दे रही है। प्रसाद योजना के तहत तीर्थस्थलों पर बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जा रहा है, जबकि स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत रामायण, कृष्ण आदिवासी जैसे थीम आधारित पर्यटन सर्किट विकसित किए गए हैं, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिले हैं। उन्होंने बताया कि स्वदेश दर्शन 2.0-प्रसाद योजना के अंतर्गत मालासेरी डूंगरी सहित साडू माता की बावड़ी, सवाईभोज मंदिर, गढ़गोठा और बरननगर को जोड़ते हुए 48.73 करोड़ रुपये की लागत से धार्मिक-पर्यटन कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। इसमें बेहतर सड़क संपर्क, पार्किंग, सभास्थल, प्रवेश द्वार, भोजनालय और आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं।
भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूर्ण:-

राजस्थान धरोहर विकास प्राधिकरण बोर्ड के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत राशि से होने वाले विकास कार्यों के लिए जिला प्रशासन द्वारा भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। मालासेरी डूंगरी मंदिर के मुख्य पुजारी हेमराज पोसवाल ने स्वागत उद्बोधन में केंद्र एवं राज्य सरकार के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इसी प्रकार सहयोग मिलता रहे, जिससे आवश्यकता अनुसार विकास कार्य निरंतर होते रहें। कार्यक्रम के अंत में आसींद विधायक जब्बर सिंह ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
यह लोग रहे मौजूदः-
कार्यक्रम में सांसद दामोदर अग्रवाल, मांडल विधायक उदयलाल भड़ाना, पूर्व मंत्री कालूलाल गुर्जर, जिला कलेक्टर जसमीत सिंह संधू, पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि प्रशांत मेवाड़ा, पूर्व विधायक रामलाल गुर्जर, जोधपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी, अनिरुद्ध सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं आमजन उपस्थित रहे।
रिपोर्टर – चंद्र प्रकाश पुरोहित
