मरू महोत्सव 2026: कैलाश खेर का लाइव कॉन्सर्ट और लोक कलाकारों की धूम:-

जैसलमेर: स्वर्णनगरी जैसलमेर में शुक्रवार को मरू संस्कृति, लोक परंपराओं और ऐतिहासिक गौरव का महाविस्फोट देखने को मिला, जब पवित्र गड़ीसर सरोवर से जग विख्यात मरू महोत्सव 2026 का भव्य आगाज हुआ। शंखनाद, ढोल-नगाड़ों की गूंज और लोकनृत्यों की धमक के बीच पूरा शहर उत्सव में डूब गया।
महोत्सव की शुरुआत नगर के आराध्य देव श्री लक्ष्मीनाथ जी मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के साथ हुई, जहां पूर्व महारावल चेतन्यराज सिंह ने परंपरानुसार पूजा कर महोत्सव की सफलता एवं जैसलमेर की सुख-समृद्धि की मंगलकामना की। इसके बाद निकली भव्य शोभायात्रा ने मरूभूमि की आत्मा को जीवंत कर दिया।
लोकसंस्कृति का सैलाब, हर कदम पर परंपरा का गौरवः-
शोभायात्रा में देश के विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकारों ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य, संगीत और लोककलाओं की ऐसी प्रस्तुतियां दीं कि गड़ीसर से लेकर शहर की गलियों तक संस्कृति का सैलाब उमड़ पड़ा। ऊंट सजे, लोकवाद्य गूंजे और रंगीन झांकियों ने जैसलमेर को एक जीवंत लोकचित्र में बदल दिया।
विदेशी सैलानी हुए अभिभूत, कैमरों में कैद किए ऐतिहासिक पलः-
मरू महोत्सव की भव्यता ने विदेशी पर्यटकों को भी खासा आकर्षित किया। पर्यटक हर दृश्य को कैमरों में कैद करते नजर आए और कई सैलानियों ने इसे “राजस्थान की जीवित विरासत” बताया। शहरवासियों ने भी जगह-जगह पुष्पवर्षा और अभिनंदन कर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी ने बढ़ाई शोभाः-
इस अवसर पर विधायक छोटूसिंह भाटी, अतिरिक्त जिला कलेक्टर परसाराम सैनी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी रश्मि रानी, उपखण्ड अधिकारी सक्षम गोयल, सहायक कलेक्टर रोहित वर्मा, नगर परिषद आयुक्त लजपाल सिंह सोढा, पुलिस उपअधीक्षक रूपसिंह इंदा, पर्यटन विभाग के अधिकारी, समाजसेवी, नगरवासी एवं बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक मौजूद रहे।
मरू महोत्सव बना जैसलमेर की पहचान का वैश्विक उद्घोषः-

मरू महोत्सव 2026 ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जैसलमेर केवल किले और रेत का शहर नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति, परंपरा और अतिथि सत्कार की विश्व राजधानी है। यह उत्सव न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम भी कर रहा है।
रिपोर्टर – चंद्र प्रकाश पुरोहित
