कवि का संदेश: उम्मीद कभी नहीं मरती:-

यह शोर का समय है,
जहाँ शब्द बहुत हैं
पर अर्थ थके हुए।
जहाँ मंच उजले हैं
पर मन के कोने
अँधेरे से भरे हैं।
यह सूचना का युग है,
पर समझ सबसे महँगी हो गई है।
सत्य आँकड़ों में बँधा है,
और संवेदना
फुटनोट बनती जा रही है।
हाथों में तकनीक है,
पर स्पर्श लुप्त हो रहा है।
आँखें स्क्रीन पर टिकी हैं,
और सामने खड़ा मनुष्य
धीरे-धीरे अदृश्य।
भीड़ में सब हैं,
पर साथ कोई नहीं।
हर कोई बोल रहा है,
पर सुनने का साहस
अब विलास कहलाता है।
हम जीत को उत्सव कहते हैं,
भले ही हार
किसी और की साँसों में लिखी गई हो।
हम आगे बढ़ रहे हैं,
पर यह पूछना भूल गए हैं
पीछे कौन छूट गया?
फिर भी
सब कुछ समाप्त नहीं हुआ है।
क्योंकि
जब कोई शिक्षक
भीड़ के विरुद्ध
एक प्रश्न खड़ा करता है,
जब कोई किसान
सूखी ज़मीन पर
फिर बीज डालता है,
जब कोई युवक
झूठ के आसान रास्ते को छोड़
सच का कठिन पथ चुनता है
तब समझो
इतिहास अभी जीवित है।
अँधेरा गहरा है,
यह सच है।
पर अँधेरा कभी प्रमाण नहीं होता
कि उजाले ने हार मान ली है।
दीप आज भी है,
कभी कविता में,
कभी प्रतिरोध में,
कभी मौन साहस में।
मत पूछो
समय कितना क्रूर है
यह देखो
तुम किस ओर खड़े हो।
क्योंकि
हर युग में
उजाला कम नहीं होता,
बस उसे जलाने वाले
कम हो जाते हैं।
और यदि तुम
अब भी
जलने को तैयार हो
तो मानो
दीप अभी शेष।
कीर्ति शर्मा
