सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ प्राथमिक शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन…

ललितपुर में 23 अगस्त 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करने की मांग की, प्रधानमंत्री को सौंपा ज्ञापनः-

उत्तर प्रदेशः प्राथमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर जिला अध्यक्ष राजेश लिटोरिया के नेतृत्व में जिले के सैकड़ों प्राथमिक शिक्षकों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन कर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के आदेश का विरोध किया। इस दौरान शिक्षकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी के माध्यम से भेजा। शिक्षकों ने मांग की कि 23 अगस्त 2011 से पूर्व नियुक्त सभी बेसिक शिक्षकों को अध्यादेश लाकर शिक्षक पात्रता परीक्षा से मुक्त किया जाए। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर के आदेश के बाद लाखों शिक्षक असमंजस और अवसाद की स्थिति में हैं।

शिक्षकों की दलीलः-

शिक्षक नेताओं ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने पाँच वर्ष से अधिक सेवा वाले शिक्षकों को टीईटी उत्तीर्ण करने का आदेश दिया है, जबकि आदेश के अन्य हिस्सों में 2001 और 2010 तक नियुक्त शिक्षकों को परीक्षा से छूट की बात कही गई है। ऐसे में विरोधाभासी स्थिति पैदा हो गई है।

उन्होंने बताया किः-

2001 से पूर्व नियुक्त शिक्षक इंटरमीडिएट और बीटीसी योग्यता धारी हैं, स्नातक व बीएड नहीं। अधिकांश शिक्षक आयु सीमा (40 वर्ष) से अधिक हैं, इसलिए आवेदन ही नहीं कर पाएंगे। मृतक आश्रित, बीपीएड और 2011 से पूर्व नियुक्त बीएड शिक्षक भी अयोग्य घोषित हो जाएंगे।
शिक्षक नेताओं का कहना है कि यदि संशोधन नहीं किया गया तो देशभर के करीब 40 लाख और उत्तर प्रदेश के लगभग 4 लाख शिक्षक नौकरी गंवा देंगे, जिससे उनके परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे।
प्राथमिक संघ के जिला अध्यक्ष राजेश लिटोरिया के नेतृत्व में हुए इस ज्ञापन कार्यक्रम में सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट परिसर में नारेबाजी कर सरकार से मांग की कि अध्यादेश लाकर कानून में संशोधन कर टीईटी से छूट प्रदान की जाए, अन्यथा आंदोलन तेज किया जाएगा।

महिलाएं शिक्षक भी उपस्थित रही इस अवसर परः-

इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएं शिक्षक भी उपस्थित रही जिला मंत्री अरुण गोस्वामी, जिला कोषाध्यक्ष संतोष रजक, आलोक स्वामी, वर्षा अग्निहोत्री ,अनिता कुशवाहा, अनुपमा कुमारी ,शोभना एवं बड़ी संख्या में अध्यापक अध्यापिकाएं उपस्थित रही।

प्रदीप रिछारिया की रिपोर्ट

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