जगदलपुर में पहली बार पहुंचा 1000 साल पुराना सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, महारुद्राभिषेक में उमड़ी श्रद्धा:-

छत्तीसगढ़: बस्तर जिले के श्रद्धालुओं के लिए सोमवार का दिन आध्यात्मिक रूप से बेहद खास रहा। नगर में पहली बार सोमनाथ के पवित्र ज्योतिर्लिंग के दिव्य दर्शन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे।
बाल विहार स्कूल में हुआ भव्य महारुद्राभिषेक:-

यह भव्य आध्यात्मिक आयोजन सोमवार शाम बाल विहार स्कूल जगदलपुर में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में वेद विज्ञान महाविद्यापीठ, बेंगलुरु के विद्वान वैदिक पंडितों द्वारा महारुद्राभिषेक संपन्न कराया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं को सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पावन और दिव्य दर्शन का लाभ मिला, जो आम तौर पर केवल तीर्थस्थलों पर ही संभव होता है। इस अवसर पर बस्तर सांसद महेश कश्यप सहित नगर के प्रतिष्ठित लोग और बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।
1000 साल पुराना है सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का अंश:-
बस्तर आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक सदस्य अश्विनी हैप्पी मग्गू ने बताया कि भारत में 12 ज्योतिर्लिंग माने जाते हैं, जिसमें से प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ जी हैं। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना युगों पहले चंद्रदेव ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए की थी। यह ज्योतिर्लिंग 1000 साल पुराना है और सोमनाथ मंदिर में मौजूद ज्योतिर्लिंग का अंश है।उन्होंने बताया कि 1000 साल पहले मोहम्मद गजनवी ने इसे खंडित किया था, परंतु अब इसके अवशेष श्री श्री रविशंकर महाराज के पास हैं। इसकी स्थापना वापस सोमनाथ मंदिर में होनी है, लेकिन गुरुदेव श्री श्री रविशंकर महाराज ने इससे पहले देश भर के लोगों को इसके दर्शन का सौभाग्य प्रदान करने का निर्णय किया। इसी के तहत बस्तर से इसकी शुरुआत हुई है। छत्तीसगढ़ में ज्योतिर्लिंग की यात्रा 10 दिनों की रहेगी।
अग्निहोत्री ब्राह्मणों ने 1000 वर्ष तक किया संरक्षित:-

वेद विज्ञान महाविद्यापीठ, बेंगलुरु के विद्वान वैदिक पंडित स्वामी प्रणवानन्द ने बताया कि 1000 वर्ष पहले जब मोहम्मद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को खंडित किया था, तब ज्योतिर्लिंग के अवशेष को दक्षिण भारत के अग्निहोत्री ब्राह्मणों द्वारा संरक्षित कर 1000 वर्ष तक पूजा-अर्चना की गई। भगवान शंकराचार्य के निर्देश पर इसे दक्षिण भारत के उस संत को सौंपना था जिसके नाम में ‘शंकर’ हो। जनवरी 2024 में अग्निहोत्री ब्राह्मणों द्वारा गुरुदेव श्री श्री रविशंकर महाराज को मूल स्वरूप का ज्योतिर्लिंग समर्पित किया गया।
उन्होंने कहा कि वही ज्योतिर्लिंग जगदलपुर आया है जिसका दर्शन और आशीर्वाद सभी सनातनी और अन्य संप्रदाय के लोगों ने प्राप्त किया। ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे, इससे सभी के मन में प्रसन्नता है।
रिपोर्टर – रजत डे
