गाजियाबाद में किसानों का हक मांगने वालों ने उठाई आवाज, वेव सिटी का लाइसेंस निरस्त करने की मांग:-

गौतमबुद्ध नगर: गाजियाबाद/दादरी। किसानों के अधिकारों और गांवों के विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर एक बार फिर आवाज बुलंद हुई है। सामाजिक संगठन जन-आंदोलन ने पूर्व में दिए गए ज्ञापन पर अब तक कोई कार्रवाई न होने पर गहरी नाराजगी जताई है और सरकार से तत्काल प्रभाव से ठोस कदम उठाने का निवेदन किया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो बड़ा जन-आंदोलन किया जाएगा।
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमवीर सिंह आर्य एडवोकेट ने बताया कि पूर्व में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन सौंपा गया था। उस ज्ञापन में मुख्य रूप से हाईटेक सिटी (वेव सिटी) का लाइसेंस निरस्त करने, किसानों की जमीन को मुक्त कराने और वर्षों से वसूले जा रहे राजस्व शुल्क के उपयोग की मांग की गई थी।
कार्रवाई न होने से बढ़ा आक्रोश:-
संगठन का कहना है कि ज्ञापन दिए जाने के बाद भी प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस चुप्पी से किसानों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का मानना है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, जबकि मामला सीधे तौर पर उनकी जमीन, आजीविका और भविष्य से जुड़ा हुआ है।
जन-आंदोलन ने स्पष्ट किया कि अब यह केवल ज्ञापन तक सीमित मामला नहीं रहा, बल्कि किसानों के अधिकारों की लड़ाई बन चुका है। इसी कारण संगठन ने सरकार से पुनः निवेदन करते हुए जल्द निर्णय लेने की मांग की है।
वेव सिटी का लाइसेंस निरस्त करना सबसे बड़ी मांग:-
ज्ञापन में एक बार फिर प्राथमिकता के साथ यह मांग दोहराई गई है कि हाईटेक सिटी (वेव सिटी) का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। संगठन का आरोप है कि पिछले लगभग 20 वर्षों में कंपनी ने न तो वादे के अनुसार विकास कार्य किए और न ही स्थानीय लोगों को कोई लाभ पहुंचाया।
ग्राम दुजाना सहित आसपास के गांवों—कचैड़ा-वारसाबाद, तालबपुर उर्फ हाथीपुर, गिरधरपुर और दुरराई—की जमीन को कम कीमत पर लेकर आज तक खाली छोड़ दिया गया है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ कई अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
2% अतिरिक्त राजस्व का मांगा हिसाब:-
संगठन ने दो प्रतिशत अतिरिक्त राजस्व शुल्क के मुद्दे को भी फिर से उठाया है। बताया गया कि पिछले 24 वर्षों से जमीन की खरीद-बिक्री पर यह अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है, लेकिन गांवों में कोई विकास कार्य नहीं हुआ।
जन-आंदोलन ने सरकार से मांग की है कि इस पूरे राजस्व का हिसाब सार्वजनिक किया जाए और अब तक वसूली गई राशि को तुरंत गांवों के विकास में लगाया जाए। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की वसूली पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।
फ्री होल्ड नीति लागू करने की मांग:-
ज्ञापन में यह भी दोहराया गया है कि ग्राम दुजाना की जमीन को हाईटेक सिटी (वेव सिटी) के अधिकार क्षेत्र से मुक्त कर क्रोसिंग सिटी की तर्ज पर फ्री होल्ड किया जाए। इससे किसानों को अपनी जमीन पर पूर्ण अधिकार मिलेगा और वे स्वतंत्र रूप से उसका उपयोग कर सकेंगे।
बड़े आंदोलन की चेतावनी:-
जन-आंदोलन संगठन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो व्यापक स्तर पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसमें धरना, प्रदर्शन और जन-जागरूकता अभियान जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।
संगठन का कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा, लेकिन अपनी मांगों को लेकर किसान और ग्रामीण अब पीछे हटने वाले नहीं हैं।
निष्कर्ष:-
पूरे मामले में प्रशासन की निष्क्रियता ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अब संगठन ने पुनः सरकार से निवेदन करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो यह मुद्दा बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।
हाईटेक सिटी (वेव सिटी) का लाइसेंस निरस्त करने, किसानों को उनका अधिकार दिलाने और गांवों के विकास को सुनिश्चित करने के लिए अब निर्णायक कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है।
रिपोर्टर – प्रतिक्षा सिंह
