विदिशा: जब दूरियां हार गईं, इंसानियत जीत गई…

गंजबासौदा: 100 KM दूर रायसेन के कैंसर पीड़ित पिता की बेबसी बनी समिति की जिम्मेदारी, बेटी का कराया धूमधाम से विवाह:-

मध्यप्रदेश: विदिशा जिले के गंजबासौदा से इंसानियत की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जहां 100 किलोमीटर की दूरी भी रिश्तों के आगे हार गई। रायसेन के कैंसर पीड़ित पिता की बेबसी को गंजबासौदा की बालाजी सेवा समिति पिथौली ने अपना दायित्व बना लिया और उसकी बेटी का विवाह धूमधाम से संपन्न कराया।

कैंसर ने तोड़ी कमर, समिति ने थामा हाथ:-

रायसेन जिले के हकीमखेड़ी गांव निवासी चरण दास वैष्णव की बेटी रजनी का विवाह मानकवाड़ा निवासी रामरतन उर्फ नीलेश से तय हुआ था। लेकिन इसी बीच चरणदास को कैंसर हो गया। इलाज में बेटी की शादी के लिए जोड़ी गई जमा पूंजी भी खर्च हो गई। आर्थिक तंगी से जूझ रहे पिता के लिए बेटी के हाथ पीले करना सपना बन गया था।

शिक्षक ने पहुंचाई खबर, समिति ने लिया संकल्प:-

इस बेबसी की खबर पिथौली धाम से जुड़े शिक्षक महेश शर्मा को लगी। उन्होंने मामला बालाजी सेवा समिति के सामने रखा। समिति ने तुरंत बेटी का विवाह कराने का भरोसा दिया और तैयारी शुरू कर दी।

25वीं बेटी की विदाई, तपती धूप में सेवा का जुनून:-

मंगलवार को गंजबासौदा के विश्वकर्मा मंदिर धर्मशाला में रजनी और रामरतन का विवाह पूरे रीति-रिवाज और सम्मान के साथ संपन्न कराया गया। भीषण गर्मी के बावजूद समिति कार्यकर्ताओं के चेहरे पर थकान नहीं, संतोष था। बारातियों का स्वागत से लेकर भोजन तक हर व्यवस्था घर के विवाह जैसी की गई।

समिति के संस्थापक गणपत सिंह राजपूत ने बताया कि 2003 से समिति गरीब कन्याओं का विवाह करा रही है। यह 25वां निशुल्क धर्म विवाह था। अध्यक्ष पूर्व पार्षद अतुल नेमा ने कहा, “बालाजी की प्रेरणा से समाज के सहयोग से व्यवस्थाएं जुट जाती हैं।”

रिपोर्टर – देवेंद्र रघुवंशी

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