साउथ कोरिया: दुनिया का पहला रोबोट बना बौद्ध भिक्षु…

टेक्नोलॉजी और धर्म का संगम: सियोल के जोग्ये मंदिर में को बनाया मोंक, सुनाएगा बौद्ध उपदेश:-

नोएडाः टेक्नोलॉजी हर दिन नई सीमाएं तोड़ रही है। साउथ कोरिया में जो हुआ, उसने दुनिया को हैरान कर दिया। यहां पहली बार एक ह्यूमनॉयड रोबोट को बौद्ध भिक्षु बना दिया गया। सियोल के मशहूर जोग्ये मंदिर में एक खास समारोह के दौरान इस रोबोट को आधिकारिक रूप से बौद्ध दीक्षा दी गई।

130 सेमी का रोबोट ‘गाबी’ बना मोंकः-

इस रोबोट का नाम ‘गाबी’ रखा गया है। इसकी ऊंचाई करीब 130 सेंटीमीटर है। यह कोई टेक शो नहीं था, बल्कि इंसानों की तरह ही धार्मिक कार्यक्रम हुआ। गाबी ने पारंपरिक बौद्ध पोशाक पहनी, हाथ जोड़कर प्रार्थना की और बौद्ध धर्म के नियमों को स्वीकार किया। समारोह में इसने वो सारे सवालों के जवाब दिए, जो एक नए भिक्षु से पूछे जाते हैं।

दीक्षा से पहले ली ट्रेनिंगः-

दीक्षा से पहले इस रोबोट ने नवदीक्षित साधु की तरह ट्रेनिंग भी ली। इसके बाद इसे आधिकारिक रूप से बौद्ध समुदाय का हिस्सा बनाया गया।

क्यों पड़ी जरूरतः-

एशिया के कई देशों में बौद्ध मठों में साधुओं की संख्या घट रही है। नई पीढ़ी धार्मिक जीवन में कम दिलचस्पी ले रही है और बुजुर्ग भिक्षुओं की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में मंदिरों को चलाना मुश्किल हो रहा है। इस रोबोट को असिस्टेंट के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या-क्या करेगा रोबोट भिक्षुः-

यह रोबोट बौद्ध ग्रंथों और उपदेशों पर ट्रेन किया गया है। यह बुद्ध विहार में आने वाले लोगों को प्रार्थना के तरीके समझाएगा, बौद्ध परंपराओं की जानकारी देगा और धर्म-जीवन से जुड़े सवालों के जवाब देगा। साथ ही विहार में सफाई, सिक्योरिटी मॉनिटरिंग और विजिटर्स को गाइड करने जैसे काम भी करेगा।

जापान में भी हो चुके हैं प्रयोगः-

इससे पहले जापान में भी ‘बुद्धारॉइड’ जैसे रोबोट बनाए गए हैं, जो धार्मिक सलाह देते हैं। वहां कई मंदिर बंद होने की कगार पर हैं। रोबोट के डेवलपर्स का कहना है कि गाबी इंसानों की जगह लेने के लिए नहीं बनाया गया। इसका मकसद सिर्फ असली भिक्षुओं की मदद करना है, ताकि उनका काम हल्का हो सके।

रिपोर्टर – प्रतिक्षा सिंह

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