नेपाल में राजनीतिक संकट: जेन-जी के आंदोलन के आगे घुटने टेके सरकार ने…

प्रधानमंत्री और मंत्रियों के इस्तीफे के बाद भी नेपाल में हिंसक आंदोलन जारी, संविधान संशोधन और शासन सुधार की मांगः-

नेपालः जेन-जी (Gen Z) के सरकार विरोधी हिंसक आंदोलन के बीच सरकार गिर गई और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, कृषि मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री समेत पांच मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा। प्रधानमंत्री और मंत्रियों के इस्तीफे से देश में राजनीतिक संकट और गहरा गया है। इस आंदोलन में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है और 300 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को जेनरेशन ज़ेड (Gen Z) प्रदर्शनकारियों के सामने हार माननी पड़ी। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें सत्ता से बेदखल कर दिया है। अब, जेनरेशन ज़ेड के प्रदर्शनकारियों ने कई राजनीतिक और सामाजिक माँगें रखी हैं। इन माँगों में संविधान का पुनर्लेखन या संशोधन, शासन में व्यापक सुधार और पिछले तीन दशकों में राजनेताओं द्वारा लूटी गई संपत्ति की जाँच शामिल है।

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आंदोलन के दौरान यह घोषणा की गई थी कि विरोध प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले सभी लोगों को आधिकारिक तौर पर शहीद का दर्जा दिया जाएगा और उनके परिवारों को राजकीय सम्मान, आदर और राहत दी जाएगी। आयोजकों ने बेरोजगारी से निपटने, प्रवासन पर अंकुश लगाने और सामाजिक अन्याय को दूर करने के लिए विशेष कार्यक्रमों का भी वादा किया है।

प्रदर्शनकारियों की मांगें:-

  • संविधान संशोधनः प्रदर्शनकारियों ने संविधान को फिर से लिखने या संशोधन करने की मांग की है, जिसमें नागरिकों, विशेषज्ञों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो।
  • शासन में सुधारः प्रदर्शनकारियों ने शासन में व्यापक सुधार की मांग की है, जिसमें पिछले तीन दशकों में राजनेताओं की ओर से लूटी गई संपत्तियों की जांच शामिल है।
  • बेरोजगारी और पलायनः आयोजकों ने बेरोजगारी से निपटने, पलायन पर अंकुश लगाने और सामाजिक अन्याय को दूर करने के लिए विशेष कार्यक्रमों का वादा किया है।

सरकार की प्रतिक्रिया:-

  • प्रधानमंत्री का इस्तीफा: प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
  • मंत्रियों के इस्तीफे: कृषि मंत्री, स्वास्थ्य मंत्री समेत पांच मंत्रियों ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।-
  • सेना की तैनाती: सेना ने सुरक्षा की कमान संभाल ली है और काठमांडू और अन्य शहरों में तैनात है।
  • राष्ट्रपति और सेना प्रमुख की अपील: राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और सेना प्रमुख अशोक राज सिगदेल ने आंदोलनकारियों से संयम बरतने और वार्ता के लिए आगे आने की अपील की है।

प्रदर्शनकारियों के एक बयान में कहाः-

प्रदर्शनकारियों की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, “यह आंदोलन किसी पार्टी या व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी और देश के भविष्य के लिए है। शांति ज़रूरी है, लेकिन यह एक नई राजनीतिक व्यवस्था की नींव पर ही संभव है।समूह ने आशा व्यक्त की कि राष्ट्रपति और नेपाल सेना उनके प्रस्तावों को सकारात्मक रूप से क्रियान्वित करेंगे।

आंदोलन के दौरान हुई हिंसा:-

इससे पहले, नेपाल में सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, कई मंत्रियों और शीर्ष नेताओं के सरकारी और निजी आवासों पर हमला किया, तोड़फोड़ की और आग लगा दी।संसद भवन और सुप्रीम कोर्ट को भी आग लगा दी गई। कई बैंकों में तोड़फोड़ और लूटपाट की गई। आंदोलनकारियों ने उस डीएसपी की भी पीट-पीटकर हत्या कर दी, जिसने प्रदर्शनकारी युवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया था। पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, उनकी पत्नी और विदेश मंत्री आरजू राणा देउबा को उनके घरों में घुसकर पीटा गया। पूर्व प्रधानमंत्री झालानाथ खनल की पत्नी राजलक्ष्मी चित्रकार को उनके घर में बंद करके ज़िंदा जला दिया गया। वित्त मंत्री बिष्णु पौडेल को भी उनके घर के सामने सड़कों पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारी पौडेल पर लात-घूँसे बरसाते नज़र आ रहे हैं। तनावपूर्ण स्थिति के कारण त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बंद कर दिया गया है।सेना ने सुरक्षा की कमान संभाल ली है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और सेना प्रमुख अशोक राज सिगदेल ने प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने और बातचीत के लिए आगे आने की अपील की है।

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